swm news: अनुमोदित निजी अस्पतालों में आरजीएचएस ठप, कर्मचारी‑पेंशनर्स पर दोहरा बोझ смотреть онлайн

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दोहरी मार झेलते कर्मचारी, जेब से इलाज का खर्च और वेतन से हो रही कटौती सवाईमाधोपुर. राजस्थान सरकारी स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) का लाभ अचानक ठप होने से जिले के हजारों कर्मचारी और पेंशनर्स परेशानी में हैं। अनुमोदित निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स ने पिछले एक माह से दवाइयां और उपचार देना बंद कर दिया है। हालात यह है कि जिन कर्मचारियों के वेतन से हर महीने अंशदान कट रहा है, उन्हें इलाज के लिए जेब से खर्च करना पड़ रहा है। यह दोहरा आर्थिक बोझ न केवल उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ा रहा है। उधर, सरकार से नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना का अचानक ठप होना कर्मचारियों के लिए विश्वासघात जैसा महसूस हो रहा है। कटौती जारी, पर सुविधाएं ठप योजना के तहत कर्मचारियों के वेतन से मासिक अंशदान की कटौती नियमित रूप से हो रही है। इसके बावजूद अस्पतालों से सेवा रोक देना कर्मचारियों के लिए दोहरा आर्थिक नुकसान साबित हो रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार ने जबरन वेतन से कटौती की व्यवस्था लागू की है, तो अस्पतालों को सेवा देने से रोकने का कोई औचित्य नहीं है। यह स्थिति कर्मचारियों के साथ अन्याय और शोषण जैसी है। जेब पर पड़ रहा बोझ दवाइयों और उपचार का खर्च निजी तौर पर उठाने से कर्मचारियों की जेब पर भारी बोझ पड़ा है। पेंशनर्स ने बताया कि उनकी मासिक पेंशन दवाइयों और इलाज में ही खत्म हो जाती है। कई लोग कर्ज लेकर इलाज करा रहे हैं। मानसिक तनाव इतना बढ़ गया है कि लोग इलाज के बजाय बीमारी झेलने को मजबूर हैं। ये बोले कर्मचारी... वापस चालू हो योजना यह स्थिति हमारे लिए बेहद अन्यायपूर्ण है। सरकार ने हमारे वेतन से हर महीने अंशदान की कटौती तय कर रखी है, ताकि हमें नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा मिल सके। लेकिन बिना किसी आदेश के अनुमोदित निजी अस्पतालों ने आरजीएचएस सुविधा बंद कर दी है। यह न केवल अनुचित है बल्कि अवैध भी है। इससे कर्मचारियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर योजना को पुनः चालू करना चाहिए। ओमप्रकाश मीना, कर्मचारी, सवाईमाधोपुर कर्मचारी हो रहे प्रभावित हमारे साथ यह सरासर अन्याय है। हर महीने वेतन से अंशदान कटता है, लेकिन जब इलाज की ज़रूरत पड़ती है तो अस्पताल आरजीएचएस सुविधा देने से मना कर देते हैं। बिना किसी सरकारी आदेश के इस तरह योजना को रोकना कानून और नियमों की खुली अवहेलना है। कटौती भी हो रही है और इलाज का खर्च भी खुद उठाना पड़ रहा है। दवाइयों के दाम इतने बढ़ गए हैं कि पेंशनर्स और कम वेतन वाले कर्मचारी सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं। रवि कुमार बैरवा, कर्मचारी, सवाईमाधोपुर ...................... इनका कहना है... यह उच्च स्तरीय मामला है। इसमें हमारा कोई लेना-देना नहीं है। इसमें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने सरकार को भुगतान के लिए पत्र लिख रखा है। भुगतान उच्च स्तर से होगा। डॉ. अनिल कुमार जैमिनी, सीएमएचओ, सवाईमाधोपुर Рекомендуем swm news: अनुमोदित निजी अस्पतालों में आरजीएचएस ठप, कर्मचारी‑पेंशनर्स पर दोहरा बोझ посмотреть онлайн видео бесплатно и без регистрации!

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