swm news: गोबर गैस से आत्मनिर्भर: दो दशक से गोबर गैस पर पका रहे खाना смотреть онлайн

16,228 просмотров 24.04.2026 00:01:19

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किसान परिवार को नहीं हुई सिलेंडर की जरूरत,ईंधन के साथ जैविक खाद भी कर रहे उपयोग सवाईमाधोपुर. घरेलू गैस सिलेंडरों की बढ़ती कीमतें और रिफिलिंग की मारामारी से आम आदमी का बजट लगातार बिगड़ रहा है। शहरों से लेकर गांवों तक लोग सिलेंडर की कमी और महंगाई से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में सूरवाल कस्बे का एक किसान परिवार आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल पेश कर रहा है, जिसने बीते दो दशकों से गैस सिलेंडर की जरूरत ही नहीं महसूस की। प्रगतिशील किसान जानकीलाल मीणा ने वर्ष 2005 में वन विभाग के सहयोग से अपने फार्म हाउस पर गोबर गैस प्लांट स्थापित किया था। इस प्लांट ने उनकी रसोई को सिलेंडर संकट से मुक्त कर दिया और साथ ही खेती में जैविक खाद का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाने तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नई राह दिखाई। सूरवाल का यह उदाहरण आज ग्रीन एनर्जी के दौर में ग्रामीण आत्मनिर्भरता का आदर्श मॉडल बन गया है। प्रतिमाह हो रही एक हजार रुपए की बचत जानकीलाल मीणा ने लगभग बीस साल पहले 2005 में अपने फार्म हाउस पर एक गोबर गैस प्लांट स्थापित किया था। इस प्लांट को स्थापित करने में वन विभाग ने पूर्ण सहयोग किया था। उन्होंने अपने बड़े परिवार की जरूरतों को देखते हुए तीन घन मीटर का एक पक्का गड्ढा बनवाया था। मीणा के अनुसार, यह तकनीक इतनी सरल और प्रभावी है कि तब से लेकर आज तक उनकी रसोई में चूल्हा कभी ठंडा नहीं पड़ा। परिवार के सात सदस्यों का खाना रोजाना बस कुछ तगारी गोबर डालने से आसानी से बन जाता है, जिसमें न तो धुएं का झंझट है और न ही कोई बदबू। इस व्यवस्था से प्रतिमाह लगभग एक हजार रुपए की बचत भी हो रही है। जैविक खाद से लहलहा रही फसलें यह प्लांट केवल गैस ही नहीं बल्कि उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद भी प्रदान करता है, जिसे मीणा सफेद सोना कहते हैं। साल में दो बार गड्ढे से निकाला जाने वाला गोबर उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कम्पोस्ट बन चुका होता है। किसान मीणा बताते हैं कि इस जैविक खाद को खेती में डालने से पैदावार में चार गुना तक बढ़ोतरी हुई है और रासायनिक खाद का खर्च भी बच रहा है। प्लांट के संचालन के लिए दो भैंस और एक पाड़ी से प्राप्त गोबर का उपयोग किया जाता है। साल 2005 से गोबर गैस आधारित चूल्हे पर खाना पकाने वाला यह प्लांट आज भी फर्स्ट क्लास स्थिति में है। फैक्ट फाइल... -साल 2005 से गोबर गैस आधारित चूल्हे पर पका रहे है खाना। -किसान के परिवार में वर्तमान में सात सदस्य है। -दो भैंस एवं एक पाड़ी से निर्मित गोबर का करते है उपयोग - प्रतिमाह हो रही एक हजार रुपए की बचत। Рекомендуем swm news: गोबर गैस से आत्मनिर्भर: दो दशक से गोबर गैस पर पका रहे खाना посмотреть онлайн видео бесплатно и без регистрации!

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